rakeshmahashabde
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rakesh mahashabde
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« on: October 03, 2007, 06:01:18 PM » |
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निकल पड़ा हूँ -एसी डगर पर
निकल पड़ा हूँ -ऐसी डगर पर मुझे मिलेगा -जिस पर चल कर - सुख का सागर !! जिस वाहनपर -- हूँ सवार, उसके पहिये -- हें चार , पहला सत्कर्म ---दूजा सदविचार , तीजा मेरा -- -चोथा सबका , मान शरीर परमेश्वर !! निकल पड़ा हूँ -ऐसी डगर पर मुझे मिलेगा -जिस पर चल कर - सुख का सागर !!
स्टेयरिंग हे - उस वाहन का , सदगुरु के -- दिव्य संदेश और वाहन मे.. ईधन प्यारा , जिसका ना कोई मोल यारा निशुल्क है सारा का सारा , वह है विश्वप्रर्थाना--स्मरण निरंतर !! निकल पड़ा हूँ -ऐसी डगर पर मुझे मिलेगा -जिस पर चल कर - सुख का सागर !!
मार्ग मिलेगा - सदगुरु भक्ती से, सुगम निरंतर अब रोयेगा - पिछे खडा दुःख, ओर रोयेंगे - व्यसन सारे, मुझे आगे बढ़ा देख कर !! निकल पड़ा हूँ -ऐसी डगर पर मुझे मिलेगा - जिस पर चल कर - सुख का सागर !!
पिछे दौडा - मेरा यारा, बोला मुझसे ले चल उसपर, जिस पर चल कर - तुझे मिलेगा, सुख का सागर एक से हुए दो - दो से चार , जल्दी होंगे सदगुरु - आशिर्वादो से, हजारो हजार निकल पड़े है - ऐसी डगर पर, हमे मिलेगा - जिस पर चल कर - सुख का सागर !!
इति शुभम ईश्वरसे यही प्रार्थना हे किवह सभी को सुखी करे राकेश महाशब्दे
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