dr.nutanpol
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« Reply #2 on: August 26, 2011, 12:32:13 PM » |
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नमस्कार आदरणीय श्री राकेश महाशब्दे जी,
बहुत खुशी की बात है की आप सद्गुरू सेवा और विश्वप्रार्थना के प्रचार-प्रसार मे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। आपकी और आपके परिवार तथा आपके सहयोगियों की निरंतर भौतिक तथा आत्मोन्नती हो यह मैं श्री गुरूचरणों से प्रार्थना करती हूँ।
जीवनविद्या अपनाने के फायदे आप जानते है। वह मै अन्य लोगों के जानकारी के लिये यँहा उद्धृत करना चाहूँगी।
जीवनविद्या अपनाने के फायदे-
जो लोग जीवनविद्या का तत्त्वज्ञान अपनाकर अपने जीवन मे जीवनविद्या ने बताई हुई राह पर चलने की कोशिश करते है उनकी जीवन मे प्रगती होती है।
1. लोगों की आर्थिक स्थिती मे सुधार आता है और उनके जीवन मे सुख, शांति और समाधान वे पाते है।
2. यह तत्त्वज्ञान अपनाकर आत्मविश्वास बढता है और दैववाद, नसीब पर निर्भर रहना, प्रवाह पतित के जैसे जीवन जीना लोग छोड देते है। तथा समझ जाते है की, वे ही उनके जीवन के शिल्पकार है।
3. जीवनविद्या का ज्ञान पाने के बाद लोग सिगरेट पीना, शराब पीना जैसी बुरी आदते छोड देते है। इसी वजह से उनकी सेहत मे सुधार आता है। उनके दवा-डॉक्टर और बुरी आदतों पर खर्च होनेवाले पैसे बच जाते है।
4. अज्ञान, अंधविश्वास और अंधश्रध्दा की वजह से लोग साधू, बाबा, भगत और फकीर-पाद्री जैसे लोगों के पास अपनी समस्यांए, बिमारीयों के इलाज के लिये जाते है। इस के लिये लोगों का काफी पैसा और वक्त खर्च होता है। यह सब जीवनविद्या का ज्ञान अपनाने बाद बच जाता है।
5. कई लोग बहुत सारा पैसा तीर्थयात्रा, व्रत करना, बली चढाना, होम हवन करना इस पर खर्च करते है। यह बातें करने मे जो पैसा खर्च होता है वह बच जाता है।
6. जीवनविद्या तत्त्वज्ञान हर बार इस सच की याद दिलाता है की हमारा सुख दूसरों के सुख मे छिपा है तथा हमारा दुख दूसरों के दुख मे छिपा है। यह तत्त्वज्ञान अपनाने के बाद घर मे आपसी रिश्तों मे सुधार आता है तथा लोगों के साथ संबंधों मे सुधार आता है।
7. जीवनविद्या पढाई करने की सही पध्दती सिखाती है। बच्चे यह बात अच्छी तरह से जान जाते है की जीवन मे अगर तरक्की करनी है तो पढाई करने के सिवा कोई चारा नही। बच्चों मे पढाई मे रूचि पैदा हो जाती है और वे बढी लगन से पढाई करते है तथा वे परीक्षाओं मे उज्ज्वल यश प्राप्त करते है।
8. जीवनविद्या तत्त्वज्ञान मे लोगों को यह बात सिखायी जाती है की, आप प्यार से काम करो और हमेशा दूसरों के बारे मे शुभ चिंतन करते रहो। इसी वजह से उनकी भौतिक प्रगती होती है और उनका जीवन सुखी बनता है।
9. जीवनविद्या कहती है की, दुख और समस्यांए उस घर मे प्रवेश करती है, जहाँ स्त्री को दुख और अपमान सहन करना पडता है। इस तत्त्वज्ञान के प्रचार के बाद समाज मे स्त्री का स्थान और मान मर्यादा का उचित आदर होने लगा है। स्त्रियों का अनादर और उनके साथ मार-पीट जैसा निंदनीय व्यवहार काफी हद तक कम हुआ है।
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